कुंभ संक्रांति 2023 -

कुंभ संक्रांति में भगवान सूर्य देव का राशि परिवर्तन होता है, जिसे कुंभ संक्रांति कहते है.. 13 फरवरी सोमवार के दिन भगवान सूर्य मकर से कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे.. कुंभ राशि में पहले से ही शनिदेव विराजमान है, ऐसे में कुंभ राशि में सूर्य देव के आगमन पर किन राशियों पर इसका प्रभाव शुभ और किन राशियों पर इसका प्रभाव अशुभ रहने वाला है, ये आगे जानेंगे..

भगवान सूर्य देव माह में 30 दिनों के बाद राशि परिवर्तन करते है, जिसे संक्रांति के रूप में पूजते है.. संक्रांति के दिन दान, स्नान, जप आदि का विशेष महत्व बताया गया है और ऐसे में याचक यदि संक्रांति के दिन दान, स्नान, जप करता है तो उसे कई गुणा यज्ञों की फल प्राप्ति होती है.. आईए जानते है कुंभ संक्रांति के दिन क्या-क्या करें…

 

कुंभ संक्रांति के दिन क्या करें?

  1. कुंभ संक्रांति के दिन प्रात:काल उठाकर गंगाजल से स्नान करें.. कहते है यदि इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करें तो याचक को कई कष्टों से मुक्ति मिलती है, बिमारियों का सामना नहीं करना पड़ता है, आरोग्य की प्राप्ति होती है..
  2. संक्रांति के दिन स्नान करने के बाद सूर्य देव की उपासना की जाती है, साथ ही इस दिन उनके मंत्रों का जाप किया जाता है.. घर में परिवार के सभी सदस्यों के ऊपर से रोगों का नाश होता है, सकारात्मकता की वृद्धि होती है.. खुशहाली का माहौल रहता है..
  3. इस दिन खाद्य वस्तु, वस्त्रों का दान गरीबों को करने से दो-गुणा फल प्राप्त होता है, मान सम्मान में वृद्धि होती है.. मृत्यु के पश्चात धाम की प्राप्ति होती है..
  4. कुंभ संक्रांति के दिन यदि याचक सूर्य देव की बीज मंत्रों का जाप करता है, तो अनेक कार्यों में सफलता और वृद्धि होती है.. आने वाले सभी दुखों से छुटकारा मिलता है..

 

कुंभ संक्रांति मुहूर्त

सनातन पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 13 फरवरी को ब्रह्म-मुहूर्त में 3 बजकर 41 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। सनातन धर्म में उदया तिथि की मान्यता अधिक होती है, अत: 13 फरवरी को कुंभ संक्रांति है। इसी प्रकार पुण्य काल सुर्योदय से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है.. इस अवधि में पूजा, जप, तप और दान कर सकते हैं..