कावड़ यात्रा पर मिलेगा विशेष फल

सावन का महीना 14 जुलाई से शुरू होने वाला है जो 12 अगस्त तक रहेगा.. आपको बता दें कि सावन के सोमवार का पहला व्रत 18 जुलाई को पड़ रहा है.. सावन भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना होता है.. सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता है.. इस महीने शिव भक्त जी-जान से भगवान भोलेनाथ की आराधना में लीन हो जाते हैं.. सावन के महीने में शिव भक्त कांवड़ यात्रा का आयोजन करते हैं.. हर साल लाखों भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हरिद्वार बाबा धाम और गंगोत्री धाम की यात्रा करते हैं.. इन तीर्थ स्थलों से गंगा जल से भरे कांवड़ को अपने कंधों पर रखकर पैदल जाते हैं और फिर वह गंगाजल भगवान शिव जी को चढ़ाया जाता है.. आइए जानते हैं क्या होती है कांवड़ यात्रा और कितने प्रकार की होती हैं..

 

जानिए क्या होती है कांवड़ यात्रा

सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ के भक्त कांवड़ यात्रा का आयोजन करते हैं और इस कांवड़ यात्रा में लाखों श्रद्धालु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हरिद्वार और गंगोत्री धाम की यात्रा करते हैं, उसके बाद इन तीर्थ स्थलों से गंगा जल से भरी कांवड़ को अपने कंधों पर रखकर पैदल आते हैं.. तत्पश्चात वह गंगाजल भगवान शिव को चढ़ाया जाता है.. इस यात्रा को कांवड़ यात्रा कहा जाता है.. पहले लोग पैदल ही कांवड़ यात्रा करते थे जबकि अब बाइक व गाड़ी से यात्रा करते हैं..

 

कितने प्रकार की होती है कांवड़

कांवड़ तीन प्रकार की होती हैं.. झूला कांवड़, खड़ी कांवड़ व डाक कांवड़.. वर्तमान समय में लोग ज्यादातर झूला कांवड़ ले जाते हैं, क्योंकि यह लें जाने में काफी आसान होता है.. इसे कहीं भी आराम से टांग कर विश्राम किया जा सकता है, हालांकि कांवड़ को हटाने के बाद इसे दोबारा शुद्ध करके उठाना पड़ता है..

 

खड़ी कांवड़ में कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जा सकता है और न ही कहीं टांगा जा सकता है.. ऐसे में आराम करने के लिए इस कांवड़ को अपने सहयोगी को देना पड़ता है..

 

डाक कांवड़ सबसे मुश्किल कांवड़ मानी जाती है.. डाक कांवड़िया कांवड़ यात्रा की शुरुआत से शिव के जलाभिषेक तक बिना रुके लगातार चलते रहते हैं, उनके लिए मंदिरों में विशेष तरह के इंतजाम भी किए जाते हैं.. जब वो आते हैं हर कोई उनके लिए रास्ता बनाता है ताकि शिवलिंग तक बिना रुके वह चलते रहें..

 

कांवड़ यात्रा को लेकर सरकार की खास तैयारी

हिंदू नव वर्ष का ये पांचवा महीना होता है.. इस महीने में पड़ने वाले सभी सावन सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना जाता है.. कई लोग सावन के सभी सोमवार को व्रत रखते हैं.. इसी के साथ इस महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि भी बेहद खास मानी जाती है, इसीलिए करोड़ों की संख्या में तमाम शिवभक्त हरिद्वार से जलाभिषेक के लिए गंगाजल लेने पहुंचते हैं, माना जा रहा है कि इस बार शिव भक्तों की तादाद बहुत ज्यादा होने की संभावना है, जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही है..

 

कांवड़ियों पर की जाएगी पुष्पवर्षा

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि कांवड़ यात्रा के लिए अभी से तैयारी की जा रही हैं. चार धाम यात्रा के साथ-साथ कांवड़ यात्रा भी काफी महत्वपूर्ण होती है.. इस साल सावन की शिवरात्रि 26 जुलाई को पड़ रही है.. श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं अनुसार इस महीने में माता पार्वती ने निराहार रहकर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप और व्रत किया था. इस महीने कई लोग अपने घर या मंदिर में रुद्राभिषेक कराते हैं. मान्यता है इस दिन जो भक्त सच्चे मन से शिव की अराधना करता है उसके सारे मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. इस दिन भगवान शिव के भक्त व्रत रख विशेष पूजा-पाठ करते हैं..